Thursday, July 20, 2017

सील के ये थूथन

#हिन्दी_ब्लागिंग
एक दृश्य देखा था, बीत गये न जाने कितने ही दिन लेकिन वह दृश्य आज भी मुझे कुछ लिखने को उकसाता है। मैं दिमाग को झटक देती हूँ लेकिन फिर वह सामने आकर बिराज जाता है। उस दृश्य के क्या मायने निकालूं समझ ही नहीं पाती। किसी भूल-भुलैय्या में ले जाए बिना अपनी बात सीधे रूप में ही कह देती हूँ – समुद्र किनारे एक समुद्री जीव का पूरा दल या हरम आराम कर रहा है। मोटा-ताजा मुखिया मस्ती में अलसाया सा पड़ा है। उसके चारों तरफ 100 के लगभग मादाएं भी अलसा रही हैं। केवल एक नर है, शेष मादा। मुखिया बूढ़ा हो चला है, मोटा-थुलथुल सा है, लेकिन उसी का साम्राज्य इस हरम पर है। तभी क्या देखती हूँ कि एक युवा मादाओं के बीच में जा पहुंचा, लेकिन किसी मादा की हिम्मत नहीं कि उसे अपना साथी बना ले। वह टोह लेता है लेकिन तभी मुखिया को पता लग जाता है और वह अपनी थूथन से उसे भगा देता है। टिप्पणीकर्ता बताता है कि यह सील है, जल और धरती दोनों पर रहती हैं, अनेक प्रकार की होती हैं। ये अपना समूह बनाकर रहती हैं, एक नर सील, ढेर सारी मादाओं को अपने हरम में रखता है और किसी अन्य नर सील की हिम्मत नहीं जो इस समूह की मादा को हाथ लगा ले। उसे मुखिया को हराना होगा तब जाकर वह मादाओं के इस हरम को हथिया सकेगा। ऐसी ही कहानी बन्दरों की भी है और अनेक प्राणियों की है।
देश में ऐसे कितने ही थुलथुले सील हैं, सभी के अपने समूह हैं। वह सील अपने दल के मुखिया हैं, वहाँ दूसरे का प्रवेश वर्जित है। कभी मुझे यह दृश्य बिहार की राजनीति में लालू के दर्शन करा देता है तो कभी उत्तर प्रदेश में मुलायम और मायावती दिखायी देते हैं। सील नामक प्राणी के दल के रूप में हरम है लेकिन यहाँ सारा तबका मौजूद है। मुलायम नामक सील की थूथन पर तो लात मारकर युवा अखिलेश विराजमान हो गये लेकिन बिहार में युवा सील के अभी मूछे भी नहीं निकली थी कि उसे दूसरों ने ही पटकनी दे दी। दल में घमासान मच गया है, लेकिन स्थापित सील जस की तस है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक इन सीलों का साम्राज्य है, न जाने किस-किस रूप में ये विराजमान हैं। युवा पीढ़ी का संघर्ष जारी है, कुछ सफल हो जाते हैं और कुछ असफल। बन्दरों का झुण्ड भी मुझे दिखायी देने लगा है, कुछ युवा मासूम बन्दर गुमसुम बैठे हैं, उन्हें किसी मादा का सहचर्य नहीं मिलता, बस जिन्दगी निकल जाती है, यूं ही। थूथन को उठाए मठाधीश अपने साम्राज्य को देखता रहता है और निगरानी रखता है कि कोई युवा वहाँ अनाधिकृत प्रवेश ना कर जाए। बस मुझे चारों तरफ सील के ये थूथन ही थूथन दिखायी देते हैं

2 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक उदाहरण लिया है आपने. वाकई जैसा आप लिख रही हैं वही सही है. आजकल राजनीति में भी यही सील समूह चारों तरफ़ हावी है.
रामराम
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Rishabh Shukla said...

सुन्दर रचना,

मेरे चिट्ठे (https://kahaniyadilse.blogspot.in/2017/07/foolish-boy.html) पर आपका स्वागत है|